Skip to main content

Posts

दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं!

ये दिवाली आपके जीवन में खुशियों की बरसात लाए, धन और शौहरत की बौछार करे, दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं!

स्व सहायता समूहों के लिए लघु ऋण योजना

स्व सहायता समूहों के लिए लघु ऋण योजना इस योजना का लक्ष्य केवल वर्तमान में लाभ कमाने वाली स्व सहायता समूहों के माध्यम से पात्र अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों के लिए स्व रोजगार उद्यम गतिविधियां चलाने हेतु लघु ऋण उपलब्ध कराना है । (i.)    सहायता की प्रमात्राः- (क) एनएसटीएफडीसी 35000/-रुपए तक प्रति सदस्य एवं अधिकतम 5.00 लाख रुपए तक प्रति स्व सहायता समूहों के लिए ऋण उपलब्ध कराता है । राज्य चैनेलाइजिंग एजेंसियां अपनी मानदंडों के अनुसार लक्ष्य समूह के लिए पात्र सब्सिडी राशि /मार्जिन मनी उपलब्ध कराएगी एवं बाकी राशि एनएसटीएफडीसी द्वारा मियादी ऋण की तरह उपलब्ध कराई जा सकती है (ख) यदि किसी मामले में राज्य चैनेलाइजिंग एजेंसियां सब्सिडी ऋण एवं मार्जिन मनी उपलब्ध कराने में असमर्थ हों तो एनएसटीएफडीसी जरूरी ऋण का 100% मियादी ऋण की तरह उपलब्ध करा सकती है । (ii)   आवृति ऋणः-           स्व सहायता समूहों को आवृति ऋण दिया जा सकता है । हालांकि एनएसटीएफडीसी योजना के अंतर्गत स्व सहायता समूहों द्वारा राज्य चैनेलाइजिंग एजेंसियों से लिया गया पूर्व ऋण र...

आदिवासी महिला

20 हजार आदिवासियों की कुर्बानी से शिरु हुई आजादी की लड़ाई

भारत की स्वतंत्रता की क्रांति की जब भी बात होती है तो 1857 की क्रांति को आजादी की पहली क्रांति बताया जा ता है जबकि ये सच्चाई नहीं है इससे पहले भी एक आजादी की लड़ाई लड़ी गयी जो सिर्फ आदिवासियों द्वारा लड़ी गयी इतिहास में इसे 'संथाल क्रांति' या संथाल हुल' के नाम से जाना जाता है इस क्रांति का नेतत्व सिद्दू और कान्हू नाम के दो आदिवासी भाइयो ने किया था ये विद्रोह 30 जून 1955 को शिरु हुआ विद्रोह की बजह थी की आदिवासी जल, जंगल और जमीन पर सदियों से अपना हक मानते आ रहे है और अंग्रेजो ने उन पर मालगुजारी कर लगा दिया इसके विरुद्ध आदिवासियों ने सिद्दू और कान्हू के नेतत्व में विद्रोह कर दिया इस कर से आदिवासी अंग्रेजो से इतने चिढ़ गए कि उन्होंने 'करो या मरो' और 'अंग्रेजो हमारी माटी छोडो' के नारे दिए। पूरा आदिबासी समाज इस लड़ाई में एकजुट था लेकिन उनके पास अंग्रेजो से लड़ने के लिए सिर्फ तीर कमान या लाठी डण्डे ही थे जबकि अंग्रेजो के पास तोपे थी और अंग्रेजो ने लड़ाई में तोपो का इस्तेमाल किया जिसमें 20 हजार आदिवासियों ने अपनी जल, जंगल और जमीन के लिये जान की कुर्बानी दी इस क्रांति पर क...

"सम्मानित पल"

"सम्मानित पल"  रविवार 4 सितम्बर 16 को अखिल भारतीय श्री मीना सामाजिक एवं शैक्षणिक समिति और श्री मीना समाज विकास समिति कोटा के तत्वावधान मे ,स्वतन्त्रता सैनानी स्व.श्री भैरवलाल काला बादल की 96वी जयंती श्रद्दापूर्वक मनाई गयी इस अवसर कोटा में उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजली अर्पित कर स्वतंत्रता सैनानी भैरवलाल कालाबादल सामुदायिक भवन में रक्तदान शिविर का शुभारम्भ शुभारम्भ किया गया .जिसमे कालाबादल जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर रक्तदान करने वाले युवाओं को प्रोत्साहित किया तथा स्वतंत् रता सेनानी भैरवलाल कालाबादल के व्यक्तितव और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके देश की आजादी में दिए गये योगदान को याद किया ! इस अवसर समाज के महानुभावो ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया और कालाबादल जी को पुष्पांजली अर्पित की! रक्तदान शिविर में युवाओं और युवतियों ने बढ चढकर भाग लिया और अपने समाज के मसीहा और स्वतंत्रता सेनानी के जन्मदिन पर 125 यूनिट रक्तदान कर उनको सच्ची श्रद्दांजली अर्पित की! रक्तदान............. इसके बाद दोपहर 2 बजे आडोटोरियम में प्रोत्साहन व प्रतिभा सम्मान समारोह का शुभारम्भ हुआ जिसमे मुख्य अथित...

गंडामन मिड डे मील मामले में पूर्व प्रधानाध्यापिका मीना देवी को 17 साल की सजा

गंडामन मिड डे मील मामले में पूर्व प्रधानाध्यापिका मीना देवी को 17 साल की सजा गंडामन मिड डे मील मामले में छपरा सिविल कोर्ट ने आरोपित पूर्व प्रधानाध्यापिका मीना देवी को 10 साल की सजा सुनायी है। एडीजे दो विजय आनंद तिवारी ने यह फैसला सुनाया। जब फैसला सुनाया जा रहा था तब कोर्ट में काफी भीड़ थी। पिछले 24 अगस्त को एडीजे ने अपने निर्णय में मीना को आईपीसी की धारा 304 व 308 के तहत दोषी माना था। वहीं उनके पति अर्जुन राय को साक्ष्य के अभाव में रिहा करने का आदेश दिया था। क्या था मामला 16 जुलाई 2013 को छपरा के मशरक प्रखंड के धर्मासती गंडामन गांव स्थित नवसृजित प्राथमिक विद्यालय में विषाक्त मिड डे मील खाने से 24 स्कूली बच्चों की मौत हो गयी थी। दिल दहला देने वाली इस घटना ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा कर दिया था। देश-दुनिया में होती रही थी चर्चा इस हादसे की चर्चा काफी दिनों तक देश-दुनिया की मीडिया में होती रही। अमेरिकी अखबार न्यूयार्क टाइम्स ने भी गंडामन हादसे की खबर को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था। इस हादसे के बाद सही तरीके से मिड डे मील योजना के संचालन के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवां...
सिंधू-साक्षी-दीपा और गोपीचंद को मिलीं BMW कारें, सचिन के हाथों मिला तोहफा बैडमिंटन स्टार सिंधू ने कहा, '' सचिन सर ने मुझसे वादा किया था कि यदि मैं रियो ओलंपिक में पदक जीतने में सफल रहूंगी तो वह मुझे बीएमडब्ल्यू कार भेंट करेंगे। उन्होंने आज अपना वादा पूरा किया। '' हैदराबाद। रियो ओलंपिक में भारतीय टीम के सद्भावना दूत रहे मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने यहां रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम में रियो की रजत पदक विजेता स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू और कांस्य पदक विजेता महिला पहलवान साक्षी मलिक के अलावा जिम्नास्ट दीपा करमाकर और बैडमिंटन कोच पुलेला गोपीचंद को बीएमडब्ल्यू कारें भेंट की।  तेंदुलकर ने इन सभी खेल हस्तियों को कार की चाबी भेंट करते हुये कहा, '' यह भारतीय खेलों के लिये बेहतरीन क्षण है। यात्रा यहां से शुरू हुई है और मुझे पूरा भरोसा है कि यह यात्रा यहां नहीं रूकेगी। हम सभी इस यात्रा में जुड़ेंगे और आपका समर्थन करेंगे। आप हमें लगातार जश्न करने के कई मौके प्रदान करते रहिये। इस समय पूरा देश खुश है और लोग खुशी से झूम रहे हैं। अभी और बड़ी चीज...